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Chapter 2 विश्व जनसंख्या-वितरण, घनत्व और वृद्धि

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अध्याय 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

Class 12 Geography Notes (Hindi)

विश्व जनसंख्या से तात्पर्य पृथ्वी पर रहने वाले कुल मानव समुदाय से है। जनसंख्या का अध्ययन भूगोल में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जनसंख्या ही सभी आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आधार होती है। इस अध्याय में विश्व की जनसंख्या का वितरण, घनत्व और वृद्धि को समझाया गया है।

जनसंख्या वितरण

जनसंख्या वितरण का अर्थ है पृथ्वी की सतह पर लोगों का फैलाव। विश्व में जनसंख्या समान रूप से वितरित नहीं है। कुछ क्षेत्र अत्यधिक घने बसे हुए हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में बहुत कम जनसंख्या पाई जाती है। सामान्यतः मैदानी क्षेत्र, उपजाऊ भूमि, समशीतोष्ण जलवायु और पर्याप्त जल संसाधन वाले क्षेत्र घनी जनसंख्या वाले होते हैं। इसके विपरीत, मरुस्थल, ध्रुवीय क्षेत्र, ऊँचे पर्वतीय भाग और घने वन क्षेत्र कम जनसंख्या वाले होते हैं।

जनसंख्या घनत्व

जनसंख्या घनत्व किसी क्षेत्र में प्रति वर्ग किलोमीटर रहने वाले लोगों की संख्या को कहते हैं। इसे कुल जनसंख्या को कुल क्षेत्रफल से भाग देकर निकाला जाता है। अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में संसाधनों पर दबाव अधिक होता है, जबकि कम घनत्व वाले क्षेत्रों में संसाधनों का पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता।

जनसंख्या वृद्धि

जनसंख्या वृद्धि से आशय किसी निश्चित समय अवधि में जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन से है। जनसंख्या वृद्धि मुख्य रूप से जन्म दर, मृत्यु दर और प्रवास पर निर्भर करती है। जब जन्म दर अधिक और मृत्यु दर कम होती है, तो जनसंख्या तेजी से बढ़ती है। आधुनिक समय में चिकित्सा सुविधाओं के विकास के कारण मृत्यु दर में कमी आई है, जिससे जनसंख्या वृद्धि तेज हुई है।

जनसंख्या वृद्धि के प्रकार

जनसंख्या वृद्धि दो प्रकार की होती है।

प्राकृतिक वृद्धि, जिसमें जन्म और मृत्यु का अंतर शामिल होता है।

वास्तविक वृद्धि, जिसमें प्राकृतिक वृद्धि के साथ प्रवास को भी जोड़ा जाता है।

जनसंख्या परिवर्तन को प्रभावित करने वाले कारक

जनसंख्या वितरण और वृद्धि पर प्राकृतिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कारकों का प्रभाव पड़ता है। जलवायु, भूमि की उर्वरता, खनिज संसाधन, उद्योग, परिवहन, शिक्षा और सरकारी नीतियाँ जनसंख्या को प्रभावित करती हैं।

जनसंख्या वृद्धि की समस्याएँ

तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण बेरोजगारी, गरीबी, आवास की कमी, भोजन की समस्या और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसलिए संतुलित जनसंख्या वृद्धि आवश्यक मानी जाती है।

निष्कर्ष

विश्व जनसंख्या का वितरण, घनत्व और वृद्धि मानव जीवन और विकास से गहराई से जुड़ा हुआ है। इस अध्याय का अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन बनाना कितना आवश्यक है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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