अध्याय 5 : भू-संसाधन तथा कृषि
1. भू-संसाधन का अर्थ
पृथ्वी की सतह से प्राप्त होने वाले प्राकृतिक संसाधनों को भू-संसाधन कहते हैं। इनमें भूमि, मिट्टी, जल, वन, खनिज आदि शामिल हैं। मानव जीवन और आर्थिक विकास के लिए भू-संसाधनों का विशेष महत्व है।
2. भूमि उपयोग (Land Use)
भूमि का विभिन्न कार्यों में प्रयोग भूमि उपयोग कहलाता है।
भूमि उपयोग के प्रमुख प्रकार
कृषि भूमि
वन भूमि
चारागाह
बंजर भूमि
आवासीय एवं औद्योगिक भूमि
भूमि उपयोग को प्रभावित करने वाले कारक
जनसंख्या दबाव
तकनीकी विकास
सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियाँ
सरकारी नीतियाँ
3. कृषि का अर्थ
फसलों की खेती, पशुपालन, बागवानी आदि गतिविधियों को सम्मिलित रूप से कृषि कहते हैं। कृषि मानव की सबसे पुरानी आर्थिक गतिविधि है।
4. कृषि के प्रकार
(क) निर्वाह कृषि
इस कृषि में किसान अपनी आवश्यकता के लिए उत्पादन करता है।
कम तकनीक
छोटे खेत
पारंपरिक साधन
(ख) वाणिज्यिक कृषि
इस कृषि में बाजार के लिए उत्पादन किया जाता है।
आधुनिक तकनीक
बड़े खेत
अधिक उत्पादन
(ग) मिश्रित कृषि
फसल उत्पादन के साथ पशुपालन भी किया जाता है।
(घ) रोपण कृषि
एक ही फसल बड़े क्षेत्र में उगाई जाती है।
उदाहरण – चाय, कॉफी, रबर
5. कृषि को प्रभावित करने वाले कारक
(क) भौतिक कारक
जलवायु
वर्षा
तापमान
मिट्टी
(ख) आर्थिक कारक
बाजार
परिवहन
पूंजी
तकनीक
(ग) सामाजिक कारक
भूमि स्वामित्व
श्रम उपलब्धता
परंपराएँ
6. भारत में कृषि की विशेषताएँ
मानसून पर निर्भरता
छोटे और बिखरे खेत
श्रम प्रधान कृषि
विविध फसलें
7. कृषि की समस्याएँ
भूमि क्षरण
सिंचाई की कमी
आधुनिक तकनीक का अभाव
प्राकृतिक आपदाएँ
8. भू-संसाधन संरक्षण का महत्व
भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन
पर्यावरण संतुलन
सतत विकास
भूमि की उत्पादकता बनाए रखना
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
भू-संसाधन की परिभाषा
भूमि उपयोग के प्रकार
कृषि के प्रकार
कृषि को प्रभावित करने वाले कारक