अध्याय 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
Class 12 Geography Notes (Hindi)
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से तात्पर्य दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आयात–निर्यात से है। कोई भी देश आत्मनिर्भर नहीं होता, इसलिए अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उसे अन्य देशों के साथ व्यापार करना पड़ता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विश्व की अर्थव्यवस्था को आपस में जोड़ता है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्व
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों को वे वस्तुएँ उपलब्ध कराता है जो उनके यहाँ उपलब्ध नहीं होतीं। यह प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करने में सहायक होता है। व्यापार के माध्यम से राष्ट्रीय आय बढ़ती है और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं। इससे देशों के बीच सहयोग और आपसी संबंध मजबूत होते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रकार
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मुख्यतः दो प्रकार का होता है—आयात और निर्यात। आयात में विदेशी वस्तुओं को देश में मँगाया जाता है, जबकि निर्यात में देश में बनी वस्तुओं को अन्य देशों में भेजा जाता है। कुछ देशों में पुनः निर्यात भी किया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कारक
प्राकृतिक संसाधन, औद्योगिक विकास, परिवहन सुविधाएँ, बाजार की माँग, सरकारी नीतियाँ और तकनीकी विकास अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करते हैं। राजनीतिक संबंध और व्यापार समझौते भी व्यापार की दिशा तय करते हैं।
व्यापार संतुलन
व्यापार संतुलन किसी देश के आयात और निर्यात के अंतर को दर्शाता है। जब निर्यात आयात से अधिक होता है तो अनुकूल व्यापार संतुलन होता है, और जब आयात अधिक होता है तो प्रतिकूल व्यापार संतुलन कहलाता है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की समस्याएँ
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में प्रतिस्पर्धा, व्यापार असमानता, विकसित और विकासशील देशों के बीच अंतर, मुद्रा विनिमय दर में परिवर्तन और राजनीतिक तनाव जैसी समस्याएँ पाई जाती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का वैश्वीकरण से संबंध
वैश्वीकरण के कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में तेजी से वृद्धि हुई है। तकनीक, संचार और परिवहन के विकास ने देशों को एक-दूसरे के और निकट ला दिया है।
निष्कर्ष
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आधुनिक विश्व की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। इसके माध्यम से देशों का आर्थिक विकास होता है और विश्व अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।