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Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

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अध्याय 5 प्राथमिक क्रियाएँ

Class 12 Geography Notes (Hindi)

प्राथमिक क्रियाएँ वे आर्थिक गतिविधियाँ हैं जिनमें मनुष्य सीधे प्राकृतिक संसाधनों से वस्तुएँ प्राप्त करता है। इन क्रियाओं में प्रकृति से कच्चा माल प्राप्त किया जाता है, जिसे आगे उद्योगों में उपयोग किया जाता है। प्राथमिक क्रियाएँ मानव जीवन की मूल आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्राथमिक क्रियाओं की विशेषताएँ

प्राथमिक क्रियाएँ प्रकृति पर अधिक निर्भर होती हैं। इनमें श्रम का योगदान अधिक होता है और तकनीक का उपयोग सीमित होता है। ये क्रियाएँ प्रायः ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक पाई जाती हैं। मौसम और जलवायु का इन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

प्राथमिक क्रियाओं के प्रकार

प्राथमिक क्रियाओं में कृषि सबसे प्रमुख क्रिया है, जिसमें फसल उत्पादन, पशुपालन और बागवानी शामिल हैं।

खनन एक अन्य महत्वपूर्ण प्राथमिक क्रिया है, जिसमें पृथ्वी की सतह से खनिजों को निकाला जाता है।

मत्स्य पालन में नदियों, झीलों और समुद्रों से मछलियाँ पकड़ी जाती हैं।

वन्य क्रियाओं में वनों से लकड़ी, गोंद, रबर और अन्य उत्पाद प्राप्त किए जाते हैं।

पशुपालन में पशुओं का पालन-पोषण कर दूध, मांस, ऊन आदि प्राप्त किए जाते हैं।

प्राथमिक क्रियाओं का वितरण

प्राथमिक क्रियाओं का वितरण प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कृषि उपजाऊ भूमि और पर्याप्त जल वाले क्षेत्रों में होती है। खनन खनिज संपन्न क्षेत्रों में किया जाता है। मत्स्य पालन तटीय और जलाशय वाले क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है।

प्राथमिक क्रियाओं का महत्व

प्राथमिक क्रियाएँ उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराती हैं। ये ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। रोजगार सृजन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसी भी देश के आर्थिक विकास की नींव प्राथमिक क्रियाओं पर ही आधारित होती है।

प्राथमिक क्रियाओं से संबंधित समस्याएँ

प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, मौसम पर निर्भरता, आधुनिक तकनीक की कमी और कम आय जैसी समस्याएँ प्राथमिक क्रियाओं से जुड़ी होती हैं। इसके कारण कई क्षेत्रों में विकास की गति धीमी रहती है।

निष्कर्ष

प्राथमिक क्रियाएँ मानव जीवन और आर्थिक विकास का आधार हैं। इनके बिना द्वितीयक और तृतीयक क्रियाओं का विकास संभव नहीं है। संतुलित विकास के लिए प्राथमिक क्रियाओं का संरक्षण और आधुनिकरण आवश्यक है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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