अध्याय 1 – मानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय-क्षेत्र
Class 12 Geography Notes (Hindi)
मानव भूगोल भूगोल की वह शाखा है जिसमें पृथ्वी की सतह पर रहने वाले मनुष्य और उसके द्वारा की जाने वाली सभी गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है। इसमें यह समझने का प्रयास किया जाता है कि मनुष्य किस प्रकार प्राकृतिक पर्यावरण से प्रभावित होता है और किस प्रकार अपने ज्ञान, तकनीक और संस्कृति के द्वारा पर्यावरण को प्रभावित करता है।
मानव भूगोल का मुख्य विषय मनुष्य, उसकी जनसंख्या, बस्तियाँ, आर्थिक क्रियाएँ, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ हैं। मानव भूगोल यह बताता है कि अलग-अलग स्थानों पर मानव जीवन में इतनी विविधता क्यों पाई जाती है।
मानव भूगोल की प्रकृति
मानव भूगोल की प्रकृति वर्णनात्मक, विश्लेषणात्मक और वैज्ञानिक होती है। इसमें मानव गतिविधियों का केवल वर्णन ही नहीं किया जाता, बल्कि उनके कारणों और प्रभावों की भी व्याख्या की जाती है। मानव भूगोल समय के साथ बदलता रहता है, इसलिए इसकी प्रकृति गतिशील मानी जाती है। इसका संबंध अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, इतिहास और मानव विज्ञान जैसे अन्य विषयों से भी है, इसलिए इसे अंतरविषयक विषय कहा जाता है।
मानव और पर्यावरण का संबंध
मानव और पर्यावरण के संबंध को समझाने के लिए तीन विचारधाराएँ बताई गई हैं।
पहली है पर्यावरणीय नियतिवाद, जिसके अनुसार मनुष्य पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर होता है।
दूसरी है संभाव्यवाद, जिसमें माना जाता है कि प्रकृति अवसर प्रदान करती है, लेकिन मनुष्य अपने ज्ञान और तकनीक से निर्णय लेता है।
तीसरी है नव-नियतिवाद, जिसमें मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर विकास पर जोर दिया जाता है।
मानव भूगोल का विषय-क्षेत्र
मानव भूगोल का विषय-क्षेत्र बहुत व्यापक है। इसके अंतर्गत जनसंख्या भूगोल, बस्ती भूगोल, आर्थिक भूगोल, सामाजिक भूगोल और राजनीतिक भूगोल का अध्ययन किया जाता है। जनसंख्या भूगोल में जनसंख्या का वितरण, घनत्व और वृद्धि का अध्ययन होता है। बस्ती भूगोल में ग्रामीण और नगरीय बस्तियों का अध्ययन किया जाता है। आर्थिक भूगोल में कृषि, उद्योग, परिवहन और व्यापार का अध्ययन किया जाता है। सामाजिक भूगोल समाज, संस्कृति, भाषा और धर्म से संबंधित है, जबकि राजनीतिक भूगोल में राज्य, सीमाएँ और राजनीतिक गतिविधियाँ शामिल हैं।
मानव भूगोल का महत्व
मानव भूगोल मानव जीवन और उसके परिवेश को समझने में सहायक है। यह संसाधनों के उचित उपयोग, क्षेत्रीय विकास और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योजनाओं के निर्माण और संतुलित विकास के लिए मानव भूगोल का अध्ययन आवश्यक है।
निष्कर्ष
मानव भूगोल मनुष्य और पर्यावरण के बीच गहरे संबंध को स्पष्ट करता है। यह विषय हमें यह सिखाता है कि प्रकृति का संतुलित उपयोग करके ही मानव का सतत विकास संभव है। बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।